कॉपीराइट क्या है?

कई देशों में, जब किसी व्यक्ति का कोई मौलिक कॉन्टेंट किसी स्टोरेज डिवाइस में सेव किया जाता है, तो वह व्यक्ति अपने-आप उस कॉन्टेंट के कॉपीराइट का मालिक हो जाता है. कॉपीराइट के मालिक के तौर पर, उस व्यक्ति के पास उस कॉन्टेंट को इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार होता है. ज़्यादातर मामलों में, किसी दूसरे व्यक्ति को कॉन्टेंट का इस्तेमाल करने की मंज़ूरी देने का अधिकार सिर्फ़ उसके कॉपीराइट के मालिक का होता है. 

किस तरह का कॉन्टेंट, कॉपीराइट के तहत आता है?
  • ऑडियोविज़ुअल कॉन्टेंट, जैसे कि टीवी शो, फ़िल्में और ऑनलाइन वीडियो
  • साउंड रिकॉर्डिंग और म्यूज़िकल कंपोज़िशन
  • लिखा हुआ कॉन्टेंट, जैसे कि लेक्चर, लेख, किताबें, म्यूज़िकल कंपोज़िशन
  • विज़ुअल कॉन्टेंट, जैसे कि पेंटिंग, पोस्टर, और विज्ञापन
  • वीडियो गेम और कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर
  • ड्रामा कॉन्टेंट, जैसे कि नाटक और म्यूज़िकल प्ले

विचारों, तथ्यों, और प्रोसेस पर कॉपीराइट लागू नहीं होता. कॉपीराइट कानून के तहत सुरक्षा पाने के लिए, यह ज़रूरी है कि बनाया गया कॉन्टेंट क्रिएटिव हो. साथ ही, उसे किसी स्टोरेज डिवाइस (हार्डवेयर) में मौजूद होना चाहिए. नाम और टाइटल पर अपने-आप कॉपीराइट लागू नहीं होता. इनके लिए कॉपीराइट कराना ज़रूरी होता है.

क्या कॉपीराइट वाले किसी कॉन्टेंट का इस्तेमाल इस तरह किया जा सकता है जिससे कॉपीराइट का उल्लंघन न हो?

कॉपीराइट का उल्लंघन किए बिना भी, कॉपीराइट वाले कॉन्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. जैसे, कॉपीराइट से जुड़े अपवाद के तौर पर फ़ेयर यूज़ और फ़ेयर डीलिंग के तहत या दूसरे व्यक्ति के कॉन्टेंट को इस्तेमाल करने की मंज़ूरी लेकर.

अगर आपको अपने वीडियो में किसी दूसरे व्यक्ति का संगीत इस्तेमाल करना है, तो इससे जुड़े विकल्पों के बारे में ज़्यादा जानें:

अपने वीडियो में संगीत इस्तेमाल करने के लिए विकल्प

 

कुछ क्रिएटर्स, क्रिएटिव कॉमंस लाइसेंस के तहत अपना कॉन्टेंट इस्तेमाल करने की मंज़ूरी देते हैं.

क्या YouTube यह तय कर सकता है कि कॉपीराइट का मालिक कौन है?

नहीं. मालिकाना हक वाले विवादों में YouTube मध्यस्थता नहीं कर सकता. जब हमें कॉपीराइट उल्लंघन की वजह से, वीडियो हटाने का पूरा और मान्य अनुरोध मिलता है, तो हम कानून के मुताबिक उस वीडियो को हटा देते हैं. साथ ही, जब हमें इसके ख़िलाफ़ कोई मान्य कानूनी विरोध मिलता है, तो इसे हम उस व्यक्ति को भेज देते हैं जिसने वीडियो हटाने का अनुरोध किया था. इसके बाद, दोनों पक्षों के पास अदालत से इस समस्या का समाधान पाने का विकल्प होता है.

क्या कॉपीराइट और ट्रेडमार्क एक ही हैं?

नहीं, कॉपीराइट बौद्धिक संपत्ति का सिर्फ़ एक रूप है. यह ट्रेडमार्क जैसा नहीं होता. ट्रेडमार्क, ब्रैंड के नाम, मोटो, लोगो, और सोर्स की पहचान बताने वाली दूसरी चीज़ों को सुरक्षित करता है, ताकि दूसरे लोग किसी खास मकसद से उनका इस्तेमाल न कर पाएं. कॉपीराइट, पेटेंट कानून से भी अलग है, जो आविष्कारों को सुरक्षित करता है.

ट्रेडमार्क या दूसरे कानूनों के उल्लंघन पर, YouTube के पास वीडियो हटाने की एक अलग प्रोसेस है.

कॉपीराइट और निजता से जुड़े अधिकार में क्या अंतर है?

किसी वीडियो, इमेज या ऑडियो रिकॉर्डिंग में आपकी मौजूदगी का यह मतलब नहीं है कि आपके पास उसका कॉपीराइट है. उदाहरण के लिए, अगर आपका दोस्त आपके साथ हुई बातचीत को रिकॉर्ड करता है, तो उस वीडियो रिकॉर्डिंग का कॉपीराइट उसी के पास होगा. आप दोनों ने जो कहा है उसका कॉपीराइट, वीडियो के कॉपीराइट से तब तक अलग नहीं माना जाएगा, जब तक कि आपकी बातें किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा न हों या पहले से रिकॉर्ड नहीं की गई हों.

अगर आपका कोई दोस्त या कोई दूसरा व्यक्ति आपसे अनुमति लिए बिना ऐसा वीडियो, इमेज या रिकॉर्डिंग अपलोड करता है जिसमें आप मौजूद हैं और आपको लगता है कि इससे आपकी निजता या सुरक्षा को खतरा है, तो आपके पास निजता से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने का विकल्प है.

कॉपीराइट से जुड़ी आम ग़लतफ़हमियां

यहां कॉपीराइट से जुड़ी कुछ आम ग़लतफ़हमियों के बारे में बताया गया है. साथ ही, यह भी बताया गया है कि YouTube पर कॉपीराइट कैसे काम करता है. ध्यान रखें कि इनमें से कोई भी काम करने पर, आपके वीडियो को कॉपीराइट उल्लंघन के आधार पर वीडियो हटाने के अनुरोध या Content ID वाले दावे के ख़िलाफ़ सुरक्षा नहीं मिलेगी:

पहली ग़लतफ़हमी: कॉपीराइट के मालिक को क्रेडिट देने का मतलब है कि उनका वीडियो इस्तेमाल किया जा सकता है

कॉपीराइट के मालिक को क्रेडिट देने से, आपको उनके कॉपीराइट वाले वीडियो को इस्तेमाल करने का अधिकार अपने-आप नहीं मिल जाता. YouTube पर वीडियो अपलोड करने से पहले, आपको यह पक्का करना होगा कि उसमें मौजूद कॉपीराइट वाले सभी कॉन्टेंट के ज़रूरी अधिकार आपके पास हों.

अगर आपको लगता है कि कॉपीराइट वाले कॉन्टेंट का इस्तेमाल, फ़ेयर यूज़ या फ़ेयर डीलिंग जैसे कॉपीराइट से जुड़े अपवाद के तौर पर किया गया है, तो भी हो सकता है कि इसे स्वीकार न किया जाए, भले ही आपने किसी दूसरे के कॉपीराइट वाले वीडियो में अपना ओरिजनल कॉन्टेंट जोड़ा हो. अपलोड करने से पहले, अपने वीडियो का ध्यान से आकलन करें और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लें.

दूसरी ग़लतफ़हमी: “गैर-लाभकारी” का दावा करने का मतलब है कि किसी भी वीडियो का इस्तेमाल किया जा सकता है

अगर कॉपीराइट से सुरक्षित किए गए काम से कमाई नहीं की जा रही है, तब भी कॉपीराइट दावों से नहीं बचा जा सकता. जैसे, अपलोड किए गए वीडियो को “सिर्फ़ मनोरंजन के लिए” या “गैर-लाभकारी” बता देना ही काफ़ी नहीं है.

फ़ेयर यूज़ या फ़ेयर डीलिंग जैसे कॉपीराइट से जुड़े अपवादों के मामले में, अदालत आपके मकसद को ध्यान में रखकर यह तय करेगी कि अपवाद के तौर पर कॉन्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं. उदाहरण के लिए, यह तर्क देना कि फ़ेयर यूज़ के तहत “गैर-लाभकारी” मकसद से कॉन्टेंट का इस्तेमाल किया गया है, कॉपीराइट उल्लंघन से बचाव के लिए काफ़ी नहीं होगा.

तीसरी ग़लतफ़हमी: दूसरे क्रिएटर्स ऐसा करते हैं, इसलिए आपको भी ऐसा करने का अधिकार है

भले ही, किसी साइट पर ऐसे वीडियो मौजूद हैं जो आपके अपलोड किए हुए वीडियो से मेल खाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको भी वह कॉन्टेंट पोस्ट करने का अधिकार है.

कभी-कभी कॉपीराइट का मालिक, अपने कुछ ही वीडियो को YouTube के प्लैटफ़ॉर्म पर दिखाने की अनुमति देता है. कभी-कभी कॉपीराइट के कई मालिकों के पास काफ़ी मिलते-जुलते वीडियो का मालिकाना हक होता है. ऐसा हो सकता है कि कोई इसकी अनुमति दे, जबकि दूसरा न दे.

चौथी ग़लतफ़हमी: iTunes से खरीदे गए या सीडी या डीवीडी पर मौजूद कॉन्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है

सिर्फ़ वीडियो खरीद लेने से आपको उसे YouTube पर अपलोड करने के अधिकार नहीं मिल जाते. कॉपीराइट के मालिक को क्रेडिट देने के बावजूद, खरीदे गए कॉन्टेंट का इस्तेमाल करके अपलोड किए गए वीडियो से कॉपीराइट कानून का उल्लंघन हो सकता है.

पांचवीं ग़लतफ़हमी: आपने वीडियो को टीवी, मूवी थिएटर या रेडियो से रिकॉर्ड किया है, इसलिए उसका इस्तेमाल किया जा सकता है

आपने खुद कुछ रिकॉर्ड किया है, इसका यह मतलब नहीं है कि आपके पास उसे YouTube पर अपलोड करने के सारे अधिकार हैं. आपने जो रिकॉर्ड किया है उसमें अगर किसी दूसरे व्यक्ति का कॉपीराइट वाला कॉन्टेंट शामिल है, जैसे कि बैकग्राउंड में चल रहा कॉपीराइट वाला संगीत, तो भी आपको कॉपीराइट के मालिकों से अनुमति लेनी होगी.

छठी ग़लतफ़हमी: यह कहा जा सकता है कि “कॉपीराइट के उल्लंघन का कोई इरादा नहीं था”

“सभी अधिकार लेखक के पास हैं,” “उल्लंघन का कोई इरादा नहीं था” या “मैं मालिक नहीं हूं” जैसे वाक्यांश या खंडन का यह मतलब नहीं है कि आपके पास कॉन्टेंट पोस्ट करने के लिए कॉपीराइट के मालिक की अनुमति है. इसका मतलब यह भी नहीं है कि वीडियो को फ़ेयर यूज़ या फ़ेयर डीलिंग जैसे कॉपीराइट से जुड़े अपवाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाए.

सातवीं ग़लतफ़हमी: कॉपीराइट वाले कॉन्टेंट के कुछ सेकंड के हिस्से का इस्तेमाल अपने वीडियो में किया जा सकता है

अगर कॉपीराइट के मालिकों की अनुमति लिए बिना, उनके कॉपीराइट वाले कॉन्टेंट के कुछ सेकंड के हिस्से का भी आपके वीडियो में इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके लिए कॉपीराइट का दावा हो सकता है. अगर आपको लगता है कि आपके कॉन्टेंट का इस्तेमाल फ़ेयर यूज़ या फ़ेयर डीलिंग जैसे कॉपीराइट से जुड़े अपवाद के तौर पर किया गया है, तो ध्यान रखें कि सिर्फ़ अदालत इस मामले में अंतिम फ़ैसला कर सकती है.

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