असल में हर क्लिक का दाम (सीपीसी): परिभाषा

किसी क्लिक के लिए आपसे ली जाने वाली फ़ाइनल रकम को असल में हर क्लिक का दाम (असल सीपीसी) कहा जाता है. अक्सर आपसे आपकी ज़्यादा से ज़्यादा हर क्लिक की लागत (ज़्यादा से ज़्यादा सीपीसी) बोली से कम -- कभी-कभी तो बहुत ही कम शुल्क लिया जाता है और यह रकम आम तौर पर एक क्लिक के लिए आपसे ली जाने वाली ज़्यादा से ज़्यादा रकम होती है.

असल सीपीसी अक्सर ज़्यादा से ज़्यादा सीपीसी से कम होती है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि Google Ads नीलामी में आप ज़्यादा से ज़्यादा उतनी रकम चुकाएंगे जितनी विज्ञापन रैंक की निचली सीमाओं को बनाए रखने और आपसे ठीक नीचे वाले प्रतिस्पर्धी की विज्ञापन रैंक को मात देने के लिए ज़रूरी है. अगर आपसे ठीक नीचे प्रतिस्पर्धा करने वाला कोई भी नहीं है (उदाहरण के लिए, अगर आपके अलावा किसी भी प्रतिस्पर्धी ने विज्ञापन रैंक की निचली सीमाओं को बनाए नहीं रखा है), तो आप सिर्फ़ रिज़र्व कीमत ही चुकाएंगे. (ज़्यादा जानने के लिए विज्ञापन रैंक की निचली सीमाओं के बारे में ज़्यादा जानें.) ध्यान रखें कि आपकी असल सीपीसी आपकी ज़्यादा से ज़्यादा सीपीसी से ज़्यादा हो सकती है. उदाहरण के लिए, ऐसा तब हो सकता है अगर आपने बेहतर सीपीसी रणनीति चालू की है या बोली घटाई या बढ़ाई है.

इसके काम करने का तरीका

हम नीलामी के समय विज्ञापन की क्वालिटी (इसमें अपेक्षित क्लिक-थ्रू दर, विज्ञापन प्रासंगिकता, और लैंडिंग पेज के अनुभव शामिल होते हैं), ज़्यादा से ज़्यादा सीपीसी बोली, विज्ञापन रैंक की निचली सीमाएं, व्यक्ति की खोज के विषय, और एक्सटेंशन के अनुमानित असर और दूसरे विज्ञापन फ़ॉर्मैट को एक साथ जोड़कर विज्ञापन रैंक तय करते हैं. एक्सटेंशन और विज्ञापन फ़ॉर्मैट के अपेक्षित प्रभाव का अनुमान लगाते समय, हम प्रासंगिकता, अपेक्षित क्लिकथ्रू दर और सर्च परिणाम पेज पर एक्सटेंशन या फ़ॉर्मैट के महत्व जैसे कारकों पर गौर करते हैं. फिर विज्ञापन दिखाने की जगह और विज्ञापन के साथ किस तरह के एक्सटेंशन और दूसरे विज्ञापन फ़ॉर्मैट दिखाई देंगे (विज्ञापन या विज्ञापन फ़ॉर्मैट दिखाई देंगे या नहीं) यह तय करने के लिए हर विज्ञापनदाता की विज्ञापन रैंक का इस्तेमाल किया जाता है.

सर्च नेटवर्क पर दिए गए विज्ञापनों के मामले में, खोज नतीजों के ऊपर दिए गए विज्ञापनों के लिए विज्ञापन रैंक की निचली सीमाएं (और इससे मिलने वाली असल सीपीसी) आम तौर पर ज़्यादा होती हैं, ताकि ज़्यादा क्वालिटी वाले अनुभव को बनाए रखा जा सके. साथ ही, यह पक्का किया जा सके कि असल सीपीसी विज्ञापन की प्रमुख जगहों के मान दिखाए. नतीजतन, खोज परिणामों के ऊपर दिखाए जाने पर चुकाई जाने वाली असल सीपीसी, खोज नतीजों के नीचे दिखाए जाने पर चुकाई जाने वाली असल सीपीसी से अक्सर ज़्यादा होती है, चाहे आपसे ठीक नीचे कोई विज्ञापन देने वाला हो या नहीं. हालांकि आपको हर क्लिक के लिए ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, फिर भी प्रमुख विज्ञापनों की क्लिकथ्रू दरें आम तौर पर ज़्यादा ऊंची होती हैं और वे आपको कुछ खास विज्ञापन एक्सटेंशन और ऐसी दूसरी विशेषताएं दिखाने में मदद कर सकती हैं जो सिर्फ़ प्रमुख विज्ञापन स्थानों में उपलब्ध हैं. हमेशा की तरह आपसे आपकी ज़्यादा से ज़्यादा सीपीसी बोली से कम भुगतान लिया जाता है (बशर्ते आप ऑटोमेटेड बिडिंग (अपने-आप बोली की सुविधा) टूल का इस्तेमाल न कर रहे हों).

यह भी ध्यान रखें कि विज्ञापन नीलामी की प्रतिस्पर्धात्मकता आपके असल हर क्लिक के दाम पर असर डाल सकती है. अगर एक ही पोज़ीशन के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले दो विज्ञापनों की विज्ञापन रैंक एक जैसी है, तो उन दोनों के पास उस पोज़ीशन को हासिल करने का समान अवसर होगा. दो विज्ञापनदाताओं के विज्ञापनों के बीच विज्ञापन रैंक में जितना ज़्यादा अंतर होगा, ज़्यादा रैंकिंग वाले विज्ञापन के जीतने की उतनी ही उम्मीद होगी. हालांकि, जीतने की बढ़ी हुई निश्चितता का फ़ायदा लेने के लिए उसे हर क्लिक की ज़्यादा लागत (सीपीसी) भी चुकानी होगी. कीमत तय करने का यही तरीका सर्च परिणाम पेज के हर विज्ञापन के क्रम पर लागू होता है. इस तरह, आपके असल हर क्लिक के दाम पर न सिर्फ़ आपसे ठीक नीचे रहने वाले प्रतिस्पर्धी का असर पड़ता है बल्कि उनसे नीचे रहने वाले प्रतिस्पर्धियों का भी असर पड़ता है. 

उदाहरण

यहां विज्ञापन रैंक और असल सीपीसी के काम करने का एक सरल उदाहरण दिया गया है. यह ऊपर बताए गए सभी विज्ञापन रैंक और कीमत के कारकों के लिए ज़िम्मेदार नहीं है, बल्कि इसका मकसद आपको हमारे एल्गोरिदम की खास जानकारी देना है:

मान लें कि पांच विज्ञापन देने वाले, Google सर्च परिणाम पेज पर खोज नतीजों के ऊपर ज़्यादा से ज़्यादा चार विज्ञापन क्रमों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. मान लीजिए, विज्ञापन देने वालों का विज्ञापन रैंक 80, 50, 30, 10 और 5 है.

मान लीजिए, अगर खोज नतीजों के ऊपर दिखाए जाने के लिए न्यूनतम विज्ञापन रैंक 40 होना ज़रूरी है, तो सिर्फ़ पहले दो विज्ञापन देने वाले (80 और 50 के विज्ञापन रैंक वाले) न्यूनतम से ज़्यादा हैं और खोज नतीजों के ऊपर दिखाए जाते हैं. ऐसे में वह विज्ञापन देने वाले जिनकी रैंक 80 है, उन्हें 50 की रैंक वाले विज्ञापनदाता से आगे निकलने के लिए ज़रूरी राशि का भुगतान (उदा: बिल योग्य इकाई के आस-पास, जो कि अमेरिका में $0.01 है) करना होगा. चूंकि प्रतिस्पर्धा में इस स्तर पर और कोई नहीं है, इसलिए 50 की रैंक वाले विज्ञापनदाता को 40 की रैंक वाले विज्ञापनदाता से आगे निकलने के लिए ज़रूरी राशि का भुगतान करना होगा.

अगर खोज नतीजों के नीचे दिखाए जाने के लिए ज़रूरी सबसे कम विज्ञापन रैंक 8 है, तो बचे हुए तीन विज्ञापन देने वालों में से दो (30 और 10 विज्ञापन रैंक वाले) खोज नतीजों के नीचे दिखाए जाएंगे. 30 की रैंक वाले विज्ञापनदाता खोज नतीजों के नीचे पहले नंबर पर दिखाई देंगे और उन्हें 10 की रैंक वाले विज्ञापनदाता से आगे निकलने के लिए ज़रूरी राशि का भुगतान करना होगा. 10 की रैंक वाले विज्ञापनदाता कम से कम 8 की रैंक वाले विज्ञापनदाता से नीचे दिखाई देंगे और उनसे आगे निकलने के लिए 10 रैंक वाले विज्ञापनदाता को ज़रूरी राशि का भुगतान करना होगा. ऐसे विज्ञापन देने वाले जिनका विज्ञापन रैंक 5 है, सबसे कम विज्ञापन रैंक नहीं पा सके और इसलिए उन्हें बिल्कुल नहीं दिखाया जाएगा.

डिसप्ले नेटवर्क पर कुछ खास विज्ञापनों के लिए आपकी असल सीपीसी, दी गई जानकारी से अलग होगी. डिसप्ले नेटवर्क विज्ञापन नीलामी के बारे में ज़्यादा जानें.

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