Content ID कैसे काम करता है

कॉपीराइट के कुछ मालिक, Content ID की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसकी मदद से, YouTube पर अपने कॉन्टेंट को आसानी से पहचानने के साथ-साथ, उसे मैनेज किया जा सकता है.

YouTube पर अपलोड किए गए वीडियो की जांच, उन वीडियो के आधार पर की जाती है जिन्हें कॉपीराइट मालिकों ने हमें सबमिट किया है. कॉपीराइट मालिक, अपने वीडियो से मेल खाने वाले वीडियो के ख़िलाफ़ ये कार्रवाइयां कर सकते हैं:

  • पूरा वीडियो देखने पर रोक लगाना
  • वीडियो पर विज्ञापन चलाकर कमाई करना. कभी-कभी, वीडियो अपलोड करने वाले के साथ वीडियो से हुई आय शेयर करना
  • वीडियो देखने वाले दर्शकों की संख्या से जुड़े आंकड़ों को ट्रैक करना

जब कॉपीराइट मालिक के वीडियो से मेल खाने वाला कोई वीडियो मिलता है, तो उस पर Content ID वाला दावा किया जाता है. साथ ही, उस वीडियो पर ऊपर दी गई तीन कार्रवाइयों में से कोई एक की जाती है.

ये कार्रवाइयां, हर देश/इलाके के हिसाब से अलग-अलग हाे सकती हैं. ऐसा हो सकता है कि जिस वीडियो से किसी देश में कमाई हो, कोई दूसरा देश उस पर रोक लगा दे या उसकी निगरानी करे.

YouTube, खास शर्तें पूरी करने वाले कॉपीराइट मालिकों को ही Content ID की सुविधा देता है. इसका ऐक्सेस पाने के लिए यह ज़रूरी है कि YouTube क्रिएटर्स, अक्सर जिन वीडियो को अपलोड करते हैं उनके ज़्यादातर हिस्से का अधिकार, सिर्फ़ कॉपीराइट मालिकों के पास हो.

YouTube ने, Content ID का इस्तेमाल करने के लिए दिशा-निर्देशों के बारे में साफ़ तौर पर बताया है. हम Content ID के इस्तेमाल और इससे जुड़े विवादों की लगातार निगरानी करते हैं, ताकि इन दिशा-निर्देशों का पालन होता रहे.

बार-बार गलत दावा करने वाले कॉपीराइट मालिकों के लिए, Content ID का ऐक्सेस बंद किया जा सकता है. साथ ही, YouTube के साथ उनकी साझेदारी खत्म की जा सकती है.

अगर आप कॉपीराइट मालिक हैं और आपको लगता है कि आपका वीडियो, Content ID की ज़रूरी शर्तें पूरी करता है, तो यह फ़ॉर्म भरें. इसके ज़रिए, कॉपीराइट से जुड़ी आपकी ज़रूरतों के बारे में हमें पता चल सकेगा.

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